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Article on Sh. Satyaparkash Sharma on 02-10-2010 PDF E-mail

in Dainik Jagran on 02-10-2010

गांधी जयंती पर विशेष....

सचिन कपूर, समालखा

आज भी हमारे बीच ऐसी विभूति हैं जिनकी गांधी जी से कभी मुलाकात नहीं हुई। शिक्षा ग्रहण करने के दौरान किताबों में उनके बारे में पढ़कर गांधी जी के विचारों से इतने अभिभूत हुए कि उनके आदर्शो को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया। राष्ट्रपिता के विचारों पर चलते हुए आज वे दूसरों के लिए प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं।

दैनिक जागरण से वार्तालाप में स्वाध्याय आश्रम पट्टीकल्याणा के संरक्षक सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि 1961 में खादी मिशन की ओर से आश्रम में चलाए जा रहे पट्टीकल्याणा के खादी विद्यालय में वाइस प्रिंसिपल बनकर वे यहां आए थे। विगत पांच दशकों से वे आश्रम में आने वाले लोगों व आश्रम के स्कूली बच्चों को गांधी जी के आदर्शोसे अभिभूत कर रहे हैं। गांधी जी के सादा जीवन, उच्च विचार, रहन-सहन को आत्मसात कर लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत बने हुए हैं।

दूसरों को सलाह से पहले खुद को परखें

सत्यप्रकाश जी कहते हैं कि पहले खुद आदर्शो को जीवन में अपनाएं तभी दूसरों को इसके लिए प्रेरित करे। शर्मा जी आश्रम के मंत्री और अध्यक्ष पद पर रहकर करीब 30 वर्षों तक लोगों की सेवा करते रहे। अब भी वह महात्मा गांधी के विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

सादगी व स्वावलंबी जीवन

82 वर्ष की आयु में भी राष्ट्रपिता के सादगी और स्वावलंबन के आदशरें पर चलकर वे सुबह पौने चार बजे उठते हैं और अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हैं। जरायु होते हुए भी वे आश्रम के कमरों और ग्राउंड की सफाई करते हैं।

योग-उद्योग-सहयोग : सत्यप्रकाश जी कहते हैं कि एक लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने को ही योग कहा जाता है। ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने से बेरोजगारी का अंत संभव है। बिना आपसी सहयोग के समाज का विकास संभव नहीं है। डॉक्टर विकास सक्सेना ने बताया कि सत्यप्रकाश शर्मा जी पर उम्र का कोई असर नहीं है वे आज भी पहले की तरह ही गांधी जी के सादगी, सदाचार और स्वावलंबन के आदर्शो को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।

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Last Updated on Sunday, 03 October 2010 11:38