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News in Jagran on 10 November 2010
Gandhi Smarak Nidhi in News

वरदान साबित हो रही प्राकृतिक चिकित्सा

पंचतत्वों के सिद्धांत पर आधारित चिकित्सा पद्धति से किया जाता है उपचार

असहाय का भी इलाज सचिन कपूर,
समालखा देर आए दुरुस्त आए कि कहावत प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति पर सटीक बैठ रही है। एलोपैथिक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव से तंग आ चुके लोगों का रुझान प्राकृतिक चिकित्सा की ओर बढ़ रहा है। गांव पट्टीकल्याणा स्थित स्वाध्याय आश्रम में प्राकृतिक चिकित्सा करवाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कई तरह के साध्य-असाध्य रोगों से पीडि़त देश भर से लोग यहां उपचार के लिए आ रहे लोगों के लिए ये पद्धति वरदान साबित हो रही है। उल्लेखनीय है कि पट्टीकल्याणा में 1968 से प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र चलाया जा रहा है। मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है और उसी सिद्धांत पर चलकर मिट्टी, पानी, धूप, आकाश, वायु के पंच तत्वों से उपचार की विधि प्रयोग में लाई जाती है। मोटापा, ब्लड प्रेशर, जोड़ों दर्द, दमा, चर्म रोग, कब्ज, गैस सहित साध्य- असाध्य रोगों का उपचार किया जाता है। हर महीने के देश भर से करीब डेढ़ सौ लोग यहां आ रहे हैं जिसमें मोटापे से परेशान लोगों की संख्या अधिक है। सुबह और शाम के समय मिट्टी में गरदन तक दबे हुए लोग आप को यहां आम नजर आ जाएंगे। चिकित्सा केन्द्र के डाक्टर ने विकास सक्सेना ने बताया कि परिवहन मंत्री ओमप्रकाश जैन भी कई बार स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए यहां आ चुके हैं। चिकित्सा पद्धतियां- मिट्टी का लेप, मिट्टी मे दबाना, मालिश, मोम की सिंकाई, मुलतानी मिट्टी लेप, मिट्टी-गोबर लेप, स्टीम बाथ, सोना बाथ, फूल टब बाथ के द्वारा इलाज किया जाता है। रोगियों को किसी प्रकार की कोई दवा नहीं दी जाती है। कहते हैं मरीज : मोटापे से परेशान विनोद कुमार, पूजा, सोनिया, प्रीति ने बताया कि उन्हें यहां आने से काफी लाभ हुआ है। वे कई जगह उपचार करवाकर थक चुके थे। लेकिन यहां आने पर उन्हें एक नया जीवन मिला है। चिकित्सा केन्द्र के डाक्टर विकास सक्सेना ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा से रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। पंच तत्वों से हर बीमारी का इलाज संभव है। डा.सक्सेना ने बताया कि एलोपैथिक के साइड इफेक्ट होने के कारण लोगों की जागरूकता प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ बढ़ रही है।